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| खाद वितरण प्रणाली में WhatsApp से टोकन और स्टॉक की पूरी जानकारी पाएं |
खाद वितरण प्रणाली में WhatsApp सेवा से टोकन और स्टॉक की जानकारी पाना हुआ बेहद आसान
खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसानों को यूरिया और डीएपी जैसे जरूरी उर्वरक प्राप्त करने के लिए सोसायटियों और वितरण केंद्रों के बाहर कई घंटों तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। इस भारी परेशानी और टोकन प्रक्रिया में होने वाली धांधली से राहत देने के लिए सरकार ने ई-विकास 2.0 व्यवस्था के तहत एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल की शुरुआत की है। अब किसान घर बैठे ही WhatsApp सुविधा के जरिए खाद का टोकन हासिल कर सकते हैं और वितरण केंद्र पर मौजूद स्टॉक की सटीक जानकारी भी पा सकते हैं। इस नई प्रणाली के जरिए न केवल किसानों का बहुमूल्य समय बचेगा, बल्कि खाद की कालाबाजारी और जबरन कॉम्बो बेचने जैसी पुरानी कुप्रथाओं पर भी पूरी तरह से लगाम लगेगी।
ई-विकास 2.0 और WhatsApp के जरिए उर्वरक वितरण में बड़ा बदलाव
किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ई-विकास 2.0 प्रणाली लागू की गई है। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर डिजिटल माध्यमों को जोड़ा गया है। अब कोई भी किसान अपने मोबाइल में WhatsApp सर्विस का उपयोग करके सीधे केंद्र की गतिविधियों से जुड़ सकता है। इससे पहले किसानों को केवल एक टोकन की जानकारी के लिए कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था, लेकिन अब WhatsApp तकनीक ने इस पूरी व्यवस्था को किसान के हाथ में सौंप दिया है।
जबरन कॉम्बो और टैगिंग से मुक्ति दिलाएगा WhatsApp सिस्टम
अक्सर खाद खरीदते समय किसानों को जबरन कोई अन्य उत्पाद या जिंक आदि लेने के लिए बाध्य किया जाता था। इस जबरन कॉम्बो पैकिंग की समस्या को इस नए नियम में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। किसान अब बिना किसी दबाव के अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक की खरीदारी कर सकते हैं। किसान WhatsApp चैट के जरिए अपनी बुकिंग और स्टॉक की स्थिति जांच कर सीधे अपनी जरूरत का खाद प्राप्त कर सकते हैं।
अतिरिक्त खाद के लिए अब नहीं लिखना होगा लंबा कारण
पुराने नियमों के तहत निर्धारित सीमा से ज्यादा खाद मांगने पर किसानों को वेब पोर्टल पर 50 शब्दों का स्पष्टीकरण देना पड़ता था, जिससे कई ग्रामीण किसान परेशान हो जाते थे। नई व्यवस्था में इस झंझट को समाप्त कर दिया गया है।
किसान अब आसानी से ड्रॉपडाउन विकल्प में से कारण चुन सकते हैं।
WhatsApp पोर्टल के जरिए किसान अपनी फसल और प्रति हेक्टेयर खाद की निर्धारित मात्रा की स्पष्ट जानकारी पा सकते हैं।
अतिरिक्त मांग दर्ज करना अब महज कुछ ही क्लिक्स का काम रह गया है।
फसल नुकसान होने पर WhatsApp सहायता और विशेष मंजूरी
यदि किसी प्राकृतिक आपदा, कीट प्रकोप या भारी वर्षा के कारण फसल नष्ट हो जाती है और किसान को दोबारा बोवनी करनी पड़ती है, तो खाद की पुनः आवश्यकता होती है। ई-विकास 2.0 व्यवस्था में 'Exceptional Handling' का विकल्प दिया गया है।
किसान अपनी अतिरिक्त खाद की मांग डिजिटल प्रणाली के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं।
एसडीएम या तहसीलदार स्तर पर 48 घंटे के भीतर इस आवेदन की समीक्षा और स्वीकृति दी जाती है।
स्वीकृति की ताजा स्थिति की सूचना भी किसान को WhatsApp नोटिफिकेशन द्वारा मिल जाती है।
टोकन की 300 की दैनिक सीमा खत्म, WhatsApp Bot से मिलेगी पल-पल की अपडेट
पूर्व में डबल लॉक सेंटरों पर प्रतिदिन केवल 300 टोकन जारी करने की बाध्यता थी, जिसकी वजह से दूर-दराज से आए कई किसान खाली हाथ लौटते थे।
अब 300 टोकन की दैनिक सीमा को पूरी तरह से हटा दिया गया है।
यदि कोई किसान टोकन लेने के 24 घंटे के भीतर खाद उठाने केंद्र पर नहीं पहुंचता, तो उसका टोकन अपने आप रद्द कर दिया जाएगा।
WhatsApp Bot की मदद से किसान सिर्फ 'HELP' या 'मदद' लिखकर WhatsApp पर खाद के स्टॉक, बफर स्टॉक, नजदीकी रिटेलर और टोकन वैधता की सटीक स्थिति जान सकते हैं।
पंचायत स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर और हेल्पलाइन सहायता
डिजिटल सेवाओं के प्रचार और किसानों को सहूलियत देने के लिए 20 अगस्त से 15 सितंबर तक पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में एग्रीस्टेक, पैक्स सदस्यता और WhatsApp सुविधाओं के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। किसी भी तकनीकी सहायता या शिकायत के लिए किसान सरकारी कार्यदिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच हेल्पलाइन नंबर +91 78802 23344 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

