WhatsApp संदेश से भंडाफोड़: बिहार में तत्काल टिकट का काला खेल बेनकाब, रेलवे की स्पेशल मॉनिटरिंग सेल गठित

Arvind Kumar
WhatsApp संदेश से भंडाफोड़: बिहार में तत्काल टिकट का काला खेल बेनकाब, रेलवे की स्पेशल मॉनिटरिंग सेल गठित
WhatsApp संदेश से भंडाफोड़: बिहार में तत्काल टिकट का काला खेल बेनकाब, रेलवे की स्पेशल मॉनिटरिंग सेल गठित

WhatsApp संदेश से हुआ बड़ा खुलासा: बिहार में तत्काल टिकट का काला खेल बेनकाब, रेलवे ने गठित की स्पेशल मॉनिटरिंग सेल

बिहार में रेलवे के तत्काल रिजर्वेशन टिकटों की अवैध कालाबाजारी को लेकर रेल प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। पवन एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे 12 फर्जी यात्रियों के पकड़े जाने के बाद पूरा रेल महकमा अलर्ट मोड पर आ गया है। इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश दलालों के मोबाइल फोन में मिले संदिग्ध WhatsApp संदेशों के जरिए हुआ है। टिकटों की इस धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा के निर्देश पर एक हाई-टेक स्पेशल मॉनिटरिंग सेल और स्पेशल एस्क्वाड टीम का गठन कर दिया गया है। जांच एजेंसियां अब WhatsApp चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के माध्यम से इस पूरे अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय सिंडिकेट को खंगालने में जुट गई हैं।

पवन एक्सप्रेस में WhatsApp टिकट सिंडिकेट का भंडाफोड़: कैसे खुली पोल?

बिहार के मुजफ्फरपुर और हाजीपुर रूट पर चलने वाली पवन एक्सप्रेस में उस समय हड़कंप मच गया जब विशेष चेकिंग के दौरान टेंपरिंग (छेड़छाड़) किए गए तत्काल टिकटों पर सफर करते हुए 12 यात्रियों को रंगे हाथों दबोचा गया। रेल अधिकारियों ने जब इन यात्रियों और संदिग्धों के पास से तीन स्मार्टफोन जब्त किए, तो उनके WhatsApp अकाउंट्स को देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए।

दलालों के इन मोबाइल फोन में मौजूद WhatsApp ग्रुप्स और व्यक्तिगत चैट्स में सीधे तौर पर टिकटों की दलाली और अवैध सौदेबाजी का कच्चा चिट्ठा सामने आया है। इस WhatsApp डेटा की शुरुआती जांच से यह साफ जाहिर होता है कि दलाल दूसरे राज्यों से तत्काल टिकट बुक करके उन्हें अवैध माध्यमों से बिहार में सप्लाई कर रहे थे।

"जितना चाहोगे उतना कन्फर्म तत्काल टिकट देंगे" – WhatsApp चैट से मिले चौंकाने वाले सुराग

जांच कर रही सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को जब्त किए गए मोबाइल के WhatsApp चैट से बेहद चौंकाने वाले मैसेज मिले हैं। इन WhatsApp मैसेजेस में दलाल साफ तौर पर ग्राहकों को यह भरोसा दे रहे थे कि "जितना चाहोगे, उतना कन्फर्म तत्काल टिकट देंगे।"

इस WhatsApp सबूत के आधार पर रेल एसपी बीणा कुमारी के सख्त आदेश के बाद हाजीपुर जीआरपी थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार ने कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि इन WhatsApp डिजिटल साक्ष्यों से इस बड़े रैकेट से जुड़े मुख्य सरगनाओं का चेहरा बहुत जल्द सामने आ जाएगा।

स्पेशल मॉनिटरिंग सेल और एस्क्वाड टीम की सख्त कार्रवाई की रूपरेखा

तत्काल टिकटों की इस धांधली पर लगाम लगाने के लिए समस्तीपुर और सोनपुर रेल मंडल द्वारा एक संयुक्त और बेहद शक्तिशाली मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। रेलवे प्रशासन ने जांच के लिए निम्नलिखित सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • WhatsApp और डिजिटल डेटा की कड़ाई से जांच: जब्त मोबाइलों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और WhatsApp हिस्ट्री की गहन फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि गिरोह के नेटवर्क को तोड़ा जा सके।

  • संदेहास्पद बुकिंग पैटर्न की पहचान: दूसरे रेलवे जोन से अचानक बुक होने वाले तत्काल टिकटों और संदिग्ध यूजर आईडी पर विशेष नजर रखी जा रही है।

  • तकनीकी कड़ियों का मिलान: जांच टीमें हर संदिग्ध टिकट के पीछे की यूजर आईडी, आईपी एड्रेस (IP Address), एजेंट कोड और पेमेंट गेटवे का बारीकी से मिलान कर रही हैं।

  • लोकल प्रिंटिंग नेटवर्क पर शिकंजा: यह भी पता लगाया जा रहा है कि दूसरे राज्यों से WhatsApp के माध्यम से भेजे गए टिकटों की डिजिटल कॉपी का बिहार में कहां-कहां प्रिंट निकाला जा रहा था।

मुजफ्फरपुर से यशवंतपुर ट्रेन तक फैली जांच की आंच

पवन एक्सप्रेस में हुए इस बड़े खुलासे के बाद रेलवे की स्पेशल एस्क्वाड टीमें अन्य प्रमुख ट्रेनों में भी सघन चेकिंग अभियान चला रही हैं। इसी क्रम में मुजफ्फरपुर से यशवंतपुर जाने वाली ट्रेन में भी कुछ यात्रियों के तत्काल टिकटों को संदिग्ध मानकर सोनपुर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजा गया था, हालांकि गहन तकनीकी जांच के बाद उन टिकटों को सही पाए जाने पर यात्रियों को आगे की यात्रा की अनुमति दे दी गई। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि दलाल दूसरे राज्यों से अवैध सॉफ्टवेयर या संदिग्ध तरीकों से तत्काल टिकट बुक करते हैं, फिर WhatsApp के जरिए उनकी पीडीएफ (PDF) फाइलें स्थानीय गुर्गों को भेजकर दोगुनी-तिगुनी कीमतों पर सीधे आम यात्रियों को बेच देते हैं।

निष्कर्ष

रेलवे द्वारा गठित यह नई स्पेशल मॉनिटरिंग सेल अब सीधे तकनीकी और जमीनी स्तर पर काम कर रही है। पकड़े गए अपराधियों के मोबाइल से मिले WhatsApp चैट इस पूरे रैकेट को खत्म करने की सबसे बड़ी चाबी साबित हो रहे हैं। रेल प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे WhatsApp या अन्य किसी भी सोशल मीडिया माध्यम पर सक्रिय किसी भी अनधिकृत टिकट दलाल के झांसे में न आएं और केवल आधिकारिक IRCTC वेबसाइट या काउंटर से ही टिकट बुक करें, अन्यथा उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

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