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WhatsApp Username Deadline Extended: सरकार का बड़ा एक्शन, 9 जुलाई तक का समय, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड का बढ़ा खतरा
केंद्र सरकार ने WhatsApp के नए और बेहद चर्चित WhatsApp Username फीचर को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने WhatsApp की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) को जारी किए गए नोटिस का जवाब देने की समयसीमा को तीन दिन और आगे बढ़ा दिया है। अब WhatsApp प्रबंधन को इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक जवाब 9 जुलाई 2026 तक सरकार के सामने पेश करना होगा। इससे पहले सरकार ने WhatsApp को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 6 जुलाई तक का ही समय दिया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सरकार को डर है कि WhatsApp का यह नया बदलाव देश में ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग हमलों और खतरनाक डिजिटल अरेस्ट के मामलों को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा सकता है। इसलिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में WhatsApp Username फीचर को किसी भी कीमत पर रोलआउट नहीं किया जाएगा।
WhatsApp Username फीचर पर सरकार ने क्यों लगाया ब्रेक
मेटा के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने हाल ही में अपने सबसे बड़े अपकमिंग बदलाव यानी WhatsApp Username फीचर की घोषणा की थी। इस नए तकनीकी बदलाव के तहत कोई भी व्यक्ति अपने निजी मोबाइल नंबर को शेयर किए बिना सिर्फ एक यूनिक WhatsApp Username के जरिए किसी से भी चैट या कॉल कर सकता है। यह यूजरनेम हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा, जैसे कि @User123। हालांकि WhatsApp का दावा है कि यह यूजर्स की गोपनीयता और फोन नंबर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाया गया है, लेकिन भारत सरकार इस तर्क से पूरी तरह सहमत नहीं है।
दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य भारतीय जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि किसी अपराधी का मोबाइल नंबर स्क्रीन पर दिखाई नहीं देगा, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) के लिए यह पता लगाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा कि WhatsApp पर फ्रॉड करने वाला अपराधी भारत में बैठा है या फिर किसी विदेशी धरती से इस काले धंधे को अंजाम दे रहा है। उदाहरण के लिए, यदि कोई जालसाज अमेरिका के +1 वाले वर्चुअल नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाता है और उस पर भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के प्रमुख की तस्वीर लगा लेता है, साथ ही वह बिल्कुल असली जैसा दिखने वाला WhatsApp Username भी सेट कर लेता है, तो आम नागरिक आसानी से झांसे में आ जाएंगे। ऐसे में नंबर न होने के कारण पुलिस के लिए अपराधी को ट्रैक करना और भारतीय नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट जैसे बड़े घोटालों से बचाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत WhatsApp को नोटिस
केंद्र सरकार ने बेहद सख्त लहजे में WhatsApp से पूछा है कि इस असुरक्षित WhatsApp Username फीचर को लेकर उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और संबंधित नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। सरकार के नोटिस के अनुसार, बिना किसी पुख्ता सुरक्षा प्रणाली और बिना मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम के यदि इस WhatsApp Username व्यवस्था को लागू किया गया, तो यह पहचान चुराने (Identity Spoofing), सरकारी अधिकारियों के फर्जी प्रोफाइल बनाने और वित्तीय संस्थानों के नाम पर बड़े पैमाने पर फ्रॉड करने का जरिया बन जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने WhatsApp को याद दिलाया है कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ (Significant Social Media Intermediary) होने के नाते वह आईटी नियमों के तहत तय की गई जवाबदेही और उचित परिश्रम (Due Diligence) की कानूनी बाध्यताओं से पीछे नहीं हट सकता है। भारत में हाल ही में लागू हुए नए टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियमों के अनुसार, किसी भी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को अपने यूजर को एक वेरिफाइड मोबाइल नंबर के साथ लिंक रखना अनिवार्य है ताकि साइबर अपराधियों पर लगाम कसी जा सके।
सुरक्षा को लेकर WhatsApp का क्या है पक्ष
इस पूरे सरकारी विवाद और नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए WhatsApp के आधिकारिक प्रवक्ता ने बयान जारी किया है। WhatsApp प्रशासन का कहना है कि यह नया WhatsApp Username फीचर अभी तक लाइव नहीं किया गया है और इसे इस साल के अंत में बहुत धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से रोलआउट करने की योजना थी। इसके साथ ही खुद को सुरक्षित साबित करने के लिए WhatsApp ने निम्नलिखित सुरक्षा उपायों का हवाला दिया है:
हाई-प्रोफाइल नामों को रिजर्व रखना: देश के बड़े सार्वजनिक नेताओं, सेलिब्रेटीज, सरकारी संस्थाओं और मेटा वेरिफाइड अकाउंट्स के मूल नामों को पहले से ही होल्ड (Reserve) कर लिया गया है ताकि कोई भी आम फ्रॉडर उनके नाम का नकली WhatsApp Username न बना सके।
लुकअलाइक (बिल्कुल समान दिखने वाले) नामों पर रोक: मुख्य और प्रामाणिक नामों से मिलते-जुलते नकली स्पेलिंग वाले WhatsApp Username के क्रिएशन पर भी तकनीकी रूप से रोक रहेगी।
यूजर अलर्ट सिस्टम: जब भी कोई अज्ञात व्यक्ति किसी नए WhatsApp Username के जरिए आपको पहली बार मैसेज भेजेगा, तो WhatsApp स्क्रीन पर खुद ब खुद अलर्ट दिखाएगा। इस अलर्ट में यह साफ लिखा होगा कि सामने वाला अकाउंट नया है, वह आपके कॉन्टैक्ट लिस्ट में है या नहीं, आपके बीच कोई कॉमन ग्रुप है या नहीं, और सबसे जरूरी बात कि वह व्यक्ति किस देश से उस WhatsApp Username को ऑपरेट कर रहा है।
ऑप्शनल यूजरनेम की: इसके अतिरिक्त, WhatsApp एक विशेष यूजरनेम की (Username Key) का विकल्प भी देने जा रहा है, जिसका सीधा मतलब यह है कि जब तक सामने वाले को आपकी वह गुप्त चाबी या कोड पता नहीं होगा, तब तक वह आपके WhatsApp Username पर डायरेक्ट मैसेज नहीं भेज सकेगा।
सरकार और मेटा के बीच होने वाली आगामी बैठकों में यह तय होगा कि क्या WhatsApp के ये सुरक्षा दावे भारतीय साइबर सुरक्षा के मानकों और डिजिटल इंडिया की सुरक्षा नीतियों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं या नहीं। तब तक के लिए भारतीय बाजार में इस फीचर के लॉन्च पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
Conclusion
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि भारत सरकार देश के करोड़ों नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और वित्तीय भलाई के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहती। WhatsApp Username फीचर भले ही वैश्विक स्तर पर गोपनीयता का एक बड़ा साधन बनकर उभरे, लेकिन भारत जैसी विशाल डिजिटल आबादी वाले देश में जहां डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं हर दिन नया रूप ले रही हैं, वहां बिना कड़े वेरिफिकेशन के इसे लागू करना विनाशकारी साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें 9 जुलाई 2026 की समयसीमा पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि WhatsApp भारतीय कानूनों के दायरे में रहकर अपनी इस तकनीक में क्या बदलाव करता है। यदि आप भी ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो किसी भी अनजान WhatsApp Username से आने वाली कॉल्स और ऑफर्स के प्रति हमेशा सतर्क रहें और किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की तुरंत शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराएं।
People Also Ask (FAQs)
Q1. भारत सरकार ने WhatsApp Username फीचर के जवाब के लिए समयसीमा को कब तक बढ़ाया है?
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से WhatsApp की मूल कंपनी मेटा को बड़ी राहत देते हुए जवाब दाखिल करने की अंतिम तिथि को 9 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है। पहले WhatsApp को 6 जुलाई तक ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सुरक्षा संबंधी दस्तावेज सौंपने का निर्देश दिया गया था।
Q2. सरकार को इस नए WhatsApp Username तकनीकी बदलाव से क्या मुख्य सुरक्षा आपत्तियां हैं?
सरकार और भारतीय खुफिया एजेंसियों का मुख्य डर यह है कि WhatsApp Username आने के बाद अपराधियों के मोबाइल नंबर छिप जाएंगे। इससे अपराधियों द्वारा बड़े अधिकारियों का रूप धारण करना (Impersonation), ऑनलाइन बैंक फ्रॉड करना, फिशिंग लिंक भेजना और मासूम लोगों को डराकर 'डिजिटल अरेस्ट' करने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
Q3. बिना मोबाइल नंबर दिखाए WhatsApp Username कैसे काम करता है?
इस आगामी फीचर के तहत हर यूजर को अपने अकाउंट के लिए एक बिल्कुल अनोखा और यूनिक WhatsApp Username चुनना होगा जो हमेशा '@' सिंबल से शुरू होगा। इसके बाद कोई भी व्यक्ति बिना आपका प्राइवेट मोबाइल नंबर जाने, सिर्फ इस WhatsApp Username को सर्च करके आपसे सुरक्षित तरीके से चैटिंग या कॉलिंग कर सकेगा।
Q4. फर्जीवाड़ा रोकने के लिए मेटा ने अपने अपकमिंग WhatsApp Username फीचर में क्या सुरक्षा दी है?
मेटा का दावा है कि नकली WhatsApp Username से होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए उन्होंने मशहूर हस्तियों, राजनेताओं और सरकारी विभागों के नामों को पहले से रिजर्व कर लिया है। इसके अलावा किसी नए WhatsApp Username से मैसेज आने पर यूजर को उसकी कंट्री लोकेशन और अकाउंट की उम्र की पूरी जानकारी दिखाई जाएगी।
Q5. क्या इस विवाद के कारण भारत में WhatsApp Username पूरी तरह से बैन हो जाएगा?
फिलहाल भारत सरकार ने इस फीचर के लॉन्च पर पूरी तरह से रोक (Pause) लगा दी है। बैन का अंतिम फैसला 9 जुलाई को मिलने वाले WhatsApp के जवाब और उसके बाद सरकार के साथ होने वाली उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों के बाद ही लिया जाएगा, जब तक सरकार संतुष्ट नहीं हो जाती।
Interactive Knowledge Check (MCQ Quiz)
Q1. केंद्र सरकार ने मेटा को सुरक्षा चिंताओं पर WhatsApp Username का जवाब देने के लिए अब कौन सी नई तारीख दी है?
Option A) 6 जुलाई 2026
Option B) 9 जुलाई 2026
Option C) 15 जुलाई 2026
Option D) 1 अगस्त 2026
Correct Answer: B) 9 जुलाई 2026
Q2. आगामी नए सुरक्षा फीचर के अनुसार हर एक यूनिक WhatsApp Username अनिवार्य रूप से किस विशेष सिंबल से शुरू होगा?
Option A) #
Option B) $
Option C) @
Option D) &
Correct Answer: C) @
Q3. सरकार के अनुसार बिना मोबाइल नंबर वाले WhatsApp Username फीचर से भारतीय समाज में किस अपराध का खतरा सबसे अधिक बढ़ सकता है?
Option A) जमीन विवाद
Option B) डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड
Option C) सड़क यातायात उल्लंघन
Option D) नकली करेंसी नोटों का प्रसार
Correct Answer: B) डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड
Q4. भारत में किस मंत्रालय ने मेटा कंपनी को इस नए WhatsApp Username विवाद को लेकर आधिकारिक कानूनी नोटिस जारी किया है?
Option A) गृह मंत्रालय
Option B) वित्त मंत्रालय
Option C) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
Option D) रक्षा मंत्रालय
Correct Answer: C) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
Q5. अनजान WhatsApp Username से आने वाले फ्रॉड मैसेज से सुरक्षा के लिए WhatsApp कौन सा इन-बिल्ट फीचर देने का दावा कर रहा है?
Option A) ऑटो-डिलीट चैट्स
Option B) कंट्री ओरिजिन अलर्ट और यूजरनेम की
Option C) फ्री वॉयस चेंजर टूल
Option D) ऑटोमेटिक मनी रिफंड सिस्टम
Correct Answer: B) कंट्री ओरिजिन अलर्ट और यूजरनेम की

