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| WhatsApp पर टिकट दिखाना पड़ेगा भारी: Railway का नया नियम, स्क्रीनशॉट दिखाने पर लगेगा जुर्माना |
रेलवे का नया फरमान: WhatsApp पर टिकट दिखाना पड़ेगा भारी, स्क्रीनशॉट मान्य नहीं; लगेगा भारी जुर्माना
ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बेहद जरूरी और चौंकाने वाली गाइडलाइन जारी की है। अगर आप भी टिकट काउंटर की लंबी लाइनों से बचने के लिए अपने फोन पर टिकट का स्क्रीनशॉट रख लेते हैं या किसी दोस्त से WhatsApp पर टिकट मंगवाकर यात्रा करते हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। रेलवे के इस नए नियम के अनुसार, अब WhatsApp पर फॉरवर्ड किया गया टिकट या किसी भी तरह का स्क्रीनशॉट चेकिंग के दौरान वैध नहीं माना जाएगा। ऐसा करने वाले यात्रियों को बिना टिकट माना जाएगा और उन्हें भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। इस फैसले के बाद से ही आम जनता और सोशल मीडिया पर लोगों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
WhatsApp टिकट और स्क्रीनशॉट पर रेलवे की बड़ी कार्रवाई
भारतीय रेलवे ने अनरिजर्व्ड (जनरल) टिकटों को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (South East Central Railway) ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि कोई यात्री यात्रा के दौरान टिकट परीक्षक (TTE) को अपने फोन में WhatsApp पर आया हुआ टिकट, कोई फोटो, पीडीएफ कॉपी या फिर स्क्रीनशॉट दिखाता है, तो उसे कानूनी रूप से वैध यात्रा प्राधिकरण नहीं माना जाएगा।
यह कड़ा कदम उस घटना के बाद उठाया गया है जिसमें हाल ही में एक यात्री को अपनी मूल डिजिटल टिकट के बजाय WhatsApp पर प्राप्त स्क्रीनशॉट दिखाने के कारण बिना टिकट मानकर जुर्माना लगाया गया था। रेलवे ने साफ किया है कि अब केवल 'रेल वन' (Rail One) ऐप पर दिखने वाला लाइव और ओरिजिनल डिजिटल टिकट ही चेकिंग के दौरान स्वीकार किया जाएगा।
Rail One ऐप के नए और कड़े नियम
रेलवे ने टिकटों की कालाबाजारी और एक ही टिकट पर कई लोगों द्वारा यात्रा करने की धोखाधड़ी को रोकने के लिए 'रेल वन' ऐप के संचालन को लेकर कुछ सख्त शर्तें लागू की हैं:
पंजीकृत मोबाइल अनिवार्य: डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकट केवल उसी मोबाइल फोन पर होना अनिवार्य है जिससे उसे बुक किया गया था। आप इसे किसी दूसरे फोन पर WhatsApp के जरिए शेयर करके इस्तेमाल नहीं कर सकते।
यात्रा के समय पहचान पत्र: ऐप में टिकट दिखाने के साथ-साथ यात्री के पास एक वैध मूल फोटो पहचान पत्र (ID Proof) होना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
ट्रेन छूटने से पहले बुकिंग: डिजिटल जनरल टिकट को ट्रेन के स्टेशन से रवाना होने से पहले ही खरीदना होगा। यदि कोई यात्री ट्रेन चलने के बाद ऐप से टिकट बुक करता है, तो उसे अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा
रेलवे के इस नए आदेश के बाद सोशल मीडिया पर यात्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और लोग इस फैसले से काफी नाराज नजर आ रहे हैं। आम जनता का तर्क है कि इस प्रकार के डिजिटल प्रतिबंधों से सबसे ज्यादा परेशानी देश के बुजुर्गों और तकनीक से दूर रहने वाले लोगों को होगी।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि रेलवे को नियम ऐसे बनाने चाहिए जिन्हें हर कोई आसानी से इस्तेमाल कर सके। बुजुर्गों को रेल वन या यूटीएस (UTS) ऐप चलाना नहीं आता है, वे अक्सर अपने बच्चों या परिवार के सदस्यों से टिकट बुक करवाकर WhatsApp पर मंगा लेते हैं। ऐसे में यह नई व्यवस्था आम लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गई है। वहीं, कुछ लोगों का यह भी सवाल है कि अगर यात्री टिकट के साथ अपना असली आईडी प्रूफ दिखा रहा है, तो केवल WhatsApp स्क्रीनशॉट होने की वजह से उसे दोषी क्यों माना जाना चाहिए? रेलवे के इस कदम ने डिजिटल इंडिया के दौर में एक नई बहस छेड़ दी है।

